-पंचदेव कुमार
हां, मैं डॉक्टर हूं !
मरीज ठीक हो जाए, तो
उनका भगवान हूं
यदि मौत हो जाए, तो
उनके लिए शैतान हूं
फीस जमा कराऊं, तो
शहर का लुटेरा हूं
नहीं जमा कराऊं, तो
रहमदिल इंसान हूं
देखिए न !
पद एक, नाम अनेक
पर काम करता हूं नेक
इसलिए
क्लिनिक में भीड़ होती है
वी.आई.पी को बड़ी चिढ़ होती है
नंबर से होता है इलाज, फिर
मरीजों का बिगड़ता है मिजाज
इनमें कुछ लोग होते है खास
फिर मुझसे मांगते है पास
नहीं देने पर होते है हताश
अरे जनाब !
घबराइये नहीं
इसी भागमभाग में बीमार हुए हैं
गुस्सा के रथ पर सवार हुए हैं
आप समय निकाल कर आइए
साथ चाय बिस्किट खाइए
दिल खोलकर हम बात करेंगे, फिर
बढ़िया से आपका इलाज करेंगे ।

2 Comments
सुंदर रचना
ReplyDeleteअच्छी रचना
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