-पंचदेव कुमार
मेरा एक दोस्त पीएम है,
दूसरा सीएम और तीसरा डीएम हैं
कई मित्र अधिकारी हैं
काम उनका सरकारी है
मुझे बहुत खुशी मिली
जब उन्हें बड़े ओहदे मिले
पर, इन खुशियों के बीच
दोस्त भी कहीं खोते गये
आज हवा में हाथ हिलाते हैं
वोट के लिए रोज नये वादे कर
अपना राजनीतिक धर्म निभाते हैं
मैं भीड़ में खड़ा सोचता हूं
मेरे मित्र कितना बदल गये हैं
जब भी मैं फोन करता हूं
कहते हैं, अभी समय नहीं है
मिलने जाता हूं, तो गार्ड बोलता है
साहब अभी घर पर नहीं है
मैं फटे हाल
फांकाकशी की जिंदगी
किसी तरह जी रहा हूं
पीएम, सीएम और डीएम
मित्रों के लिए कमीज सी रहा हूं
मेरे साथ खेलने वाले दोस्त

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