पंचदेव कुमार  

(01, मई 2024)

हां मैं मजदूर हूं

हां मैं मजदूर हूं
माना कि मजबूर हूं
अपना घर-वार छोड़कर
बच्चों से मुंह मोड़कर
प्रदेश में कमाता हूं
खुद को भूखे रख
परिवार का पेट भरता हूं।।
ठंड में ठिठुर कर
गर्मी में तपकर
घंटों मेहनत करता हूं
कुछ रुपये जमा हो जाय, तो
ट्रेन-बस में धक्के खाकर
घर लौटता हूं
राशन दुकान का बिल
और कई कर्ज चुकाता हूं
किसी तरह बच्चों को
सरकारी स्कूल में पढ़ता हूं
फिर खाली हाथ
फका-कशी की जिंदगी
खुशी से बीतता हूं ।।
सच पूछो तो,
परिवार छोड़कर
परदेश जाने का मन
नहीं करता
पर क्या करूं,
लाख कोशिश के बाद भी
यहां काम भी, तो नहीं मिलता
मेरे लिए तो मजदूर दिवस
की छुट्टी भी बेकार है
क्यों की यहां वर्षों से
निक्कमी सरकार है
चींख रही है जनता
और बहरी सरकार है।।