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वृद्ध मां को घर लाना होगा

वृद्ध मां को घर लाना होगा

- पंचदेव कुमार

टिमटिमाते दीये को
हल्की सी हवा 
बुझा जाती थी 
छा जाता था अंधेरा
पेड़ों की परछाइयां भी
हमें डरा जाती थी.
हमें चिल्लाते ही मां 
दौड़कर आ जाती थी
माचिस पर तिल्ली रगड़कर 
दीये को जला जाती थी.
टिमटिमाते दीये को 
हल्की सी हवा
बुझा जाती थी.

चुन कर लाये जलावन से 
मां भोजन पकाती थी 
हमें प्यार से खिलाकर
गोद में सुलाती थी .
रोज मवेशियों के लिए
चारा लेने जाती थी
तेज धूप में सिर पर 
टोकरी लिये आती थी.

खुद को तपाकर 
हमें जवान करनेवाली मां 
आज बीमार हो गयी है
थक गया शरीर तो 
लाचार हो गयी है.

हमने भी प्यार का 
अच्छा सिला दिया 
सहारा देने की बजाय
घर से निकाल दिया. 

कल हमने सुना
मां मृत्यु से लड़ रही है 
फिर भी हमारे लिए
सलामती की दुआ
खुदा से कर रही है.

हमें पापों का प्राश्चित
अब करना होगा 
वृद्धा मां को बुलाकर 
हर हाल में घर लाना होगा 
हर हाल घर लाना होगा .


    

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