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अपने बच्चों को अंगारों पर भी चलने का हुनर देना होगा

पंचदेव कुमार 
सीतामढ़ी
हमारा आज
हमारा समाज
हमारा देश
शिक्षित हो
सशक्त हो

बेटा-बेटी सबल बने
देश का गौरव प्रबल बने
लौटा लाये पूर्वजों की पहचान
दिला दे अशोक स्तम्भ का स्वाभिमान

हम भूल गये है अपनी शक्ति
हटा दिये है अंखडता की तख्ती
छीन रहा है हमसे हमारा अधिकार
फिर भी चुप बैठे हैं हम अपने घरद्वार

हमें खुद जगना होगा ,सबों जगाना होगा
विजय रथ को हर हाल में आगे बढ़ाना होगा

इन परिकल्पनाओं की पूर्ति को
हमें मन मे दृढ़ संकल्प लेना होगा
अपने बच्चों को अंगारों पर भी
चलने का हुनर देना होगा

शायद छोटी पर जाए उम्र हमारी
लेकिन जारी रहेगी जंग हमारी

खण्ड-खण्ड में टूटकर
बिखर गये हैं हम
जरा नजर उठाकर देखिये
साजिश की बेड़ियों में
कैसे जकर गये हैं हम

भूल गये है पूर्वजों को शायद
जिन पर अत्याचार हुआ
जो लड़ने चले थे उपेक्षितों की लड़ाई
उन पर ही खंजर से वार हुआ

अगर अभी न सम्भले बंधु
तुम्हारा अस्तित्व ही मिट जाएगा
देखते रह जाओगे विकास के सपने
एक दिन हमारा संविधान ही बदल जायेगा. 



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