चुनाव में पहले
अपना लाइफ
सिक्योर करते हैं,
जीतने के बाद
उगाही भी पियोर करते हैं।
टिकट नहीं मिला, तो
दल बदल लेते हैं,
टिकट मिला, तो
जीतने के बाद भी
मन बदल लेते है।
इस पार्टी में, तो
कभी उस पार्टी में
जनता देखती है,
अब जायेंगे किस पार्टी में।
इस बीच सरकार भी
बनती है और गिरती है,
पर, कोई भी पार्टी हो,
जनता की कहां सुनती है।
विकास के मुद्दे
गौण हो जाते हैं,
सवाल पूछिए तो,
मौन हो जाते हैं।
वादा किए थे हमसे
वोट दोगे तो,
रोड बनवा देंगे।
कुछ नोट दोगे, तो
घर बनवा देंगे।
औउरो बोले!
ये बबुआ जीतेंगे तो,
महंगाई दूर करेंगे
गांव-जबार का,
विकास भी खूब करेंगे।
जनता कहले....
ये नेताजी सही में !
विकास किये बही में
रेल बेचले, सेल बैचले
बेच दिये एयरपोर्ट
येतना किये हैं काम
बताइए कैसे करें
हम सब स्पोर्ट।
- पंचदेव कुमार
12/4/2024, 01:47
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