जिंदगी के सफर में
फूल, तो कभी कांटे
सच, तो कभी झूठ
आग, तो कभी पानी
सम्मान, तो कभी अपमान
इन दुश्वारियों के बीच इंसान
चलकर कभी बनता है महान
जिंदगी के सफर में
बचपन, तो कभी बुढ़ापा
हार, तो कभी जीत
खुशी, तो कभी गम
ऊंचाई, तो कभी खाई
का सामना कर इंसान
एक दिन बनता है महान
जिंदगी के सफर में
रिश्ते बनते हैं, तो कभी टूटते हैं
नये मिलते हैं, तो पुराने बिछड़ते हैं
फूल खिलते हैं, फिर मुरझाते हैं
नदियां उफनाती हैं, कभी सूखती हैं
तूफान, भूकंप तो कभी अंधेरी रात
इन दुर्गम राहों पर चल कर इंसान
बड़ी मुश्किल से बनता है महान
जिंदगी के सफर में
यह शरीर थक जाता है
पांव भी थम जाता है
आंखें जवाब दे देती है
आवाज लरखरा जाती है
अंत समय जब जाता है
एक दिन ये सांसे भी थम जाती है।।
मरने के बाद भी भले_बुरे किस्से
घर_घर हो जाते हैं शुरू
झूठा ही सही, पल भर को
दुश्मन भी बहा जाते है आंसू
फिर यश_अपयश की चादर ओढ़ाकर
अर्थी पर बांधे और चार जाने उठाकर
अच्छे बुरे कर्मों का हिसाब लगाकर
मरे इंसान को पहुंच देते हैं शमशान
फिर नेता भी उसे बना देते हैं महान
जिन्दगी के सफर में.......
पंचदेव कुमार
22 मार्च 2024, रात 2:15
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