तपती धरती
जलते पांव
कहीं तो मिले
पेड़ की छाव
बढ़ रहा
सूरज का ताप
थम रही
पैरों की चाप
काश मौसम
बदल जाता
कम से कम
बादलों की छाया
तो मिल जाती
काश
इन सड़क किनारे हम
पेड़ लगाये होते, तो
आज तपती धूप में
पांव न जलाये होते
हर साल पारा
चढ़ रहा है, और
जंगलों का दायरा
घट रहा है
हमें अधिकाधिक पड़े
लगाना होगा
सुरक्षित जीवन के लिए
पानी भी बचाना होगा
पंचदेव कुमार
25 अप्रैल 2024
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