यादों के झरोखों से...
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जिंदगी के सफर में
हमेशा साथ होते थे
मेरे डगमगाते कदमों को
पिता जी सम्भाल लेते थे
मैं करता था जब भी गलती
वह झटसे डांट देते थे
सिखाते थे जीने का सलीका
हमेशा सबों के साथ होते थे।।
- पंचदेव कुमार
21/4/2024, 03:35
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