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रजनीश रंजन से पंचदेव कुमारकी साक्षात्कार

रजनीश रंजन-

नमस्कार सर, आपने अपने व्यस्ततम समय में से मुझे साक्षात्कार के लिये समय दिया,इसके लिये मैं आभारी रहूँगा |


पंचदेव जी-

रजनीश जी आपका फ़ोन आते ही बहुत अच्छा लगता है इसी बहाने मुम्बई की आवोहवा से परीचित हो जाते हैं और बहुत सारी प्रोडक्टिव बातें भी। मेरी तरफ़ से भी धन्यवाद रखिए।


रजनीश रंजन-

पत्रकारिता के क्षेत्र में आने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली ?


पंचदेव कुमार- 

मैं पचपन से संकोची किस्म का लड़का था।तो कोई बात कहनी हो तो कह भी नही पाता था, जब कहने का मन होता तो कोई सुनता नहीं था। एक दिन की बात है,उस समय मैं बारहवीं में पढ़ता था। अपने चाचा के साथ बाइक से कहीं जा रहा था ,इतने में चौराहे पे एक पुलिस वाले ने बाइक रुकवाई। जबकि हमलोगों के पास हेलमेट से लेकर ड्राइविंग तक के सारे कागज़ात थे।फिर भी पुलिस वाले ने हमलोगों से पैसे लिए। मैंने सोचा इसकी शिकायत किससे की जा सकती है और ये बात बहुत लोगों तक कैसे पहुंचेगी । चाचा के एक दोस्त पत्रकार थे तो उन्होंने ये स्टोरी छोटे कॉलम में अखबार में छाप दी। उस पुलिस वाले पे करवाई हुई । मैंने सोचा भाई ये तो कमाल है...फिर पहली बार यहीं से पत्रकारिता का ख्वाब देखा।


रजनीश रंजन-

सर पहले अखबार लिख कर बिकता था ,अब बिक कर लिखता है। इस पर आपकी क्या राय है और इस से कितना सहमत हैं ?


पंचदेव जी-

देखिए रजनीश जी , इसमें कोई दो राय नहीं है। पहले मैं एक अखबार के लिये काम करता था, (नाम नहीं लूंगा) उस से मेरा अलग होने का फैसला ही इसी के लिये था।अच्छी से अच्छी स्टोरी भी लिख कर देता था तो संपादक महोदय उसे दरकिनार कर किसी बबलू भैया,कोई अध्यक्ष, तो किसी पार्टी नेता की उलूल जुलूल चीज़ें छापने में ज़्यादा दिलचस्पी रखते थे। जिसके कई कारण थे कभी कोई विज्ञापन तो कभी समय से पहले कोई न्यूज़। जिससे मेरा हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहता था।इसलिये मैंने विषाक्त माहौल से जल्द ही निकलने का निर्णय लिया था।


रजनीश रंजन- आज के डिजिटल युग में पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाये रखने के लिये आप क्या उपाय करते हैं


पंचदेव जी-

मैं खबर लिखने से पहले क्रॉस-चेक करता हूँ, और जहां शक होता है वहां और गहराई से जांच करता हूँ। और हर पत्रकार के अपने अपने विश्वसनीय सोर्स होते हैं, मेरे भी हैं ।उस से पुष्टि करता हूँ और निष्पक्षता बनाए रखने की पूरी कोशिश करता हूँ।"

रजनीश जी,हालांकि,पत्रकारिता में कई बार

गलती की गुंजाइश हो जाती है, इसलिए मैं प्रतिक्रिया और सुधार को भी खुले दिल से स्वीकारता हूँ लेकिन बहुत रेयर हीं ऐसा होता है।


रजनीश रंजन- 

आपकी नजर में पत्रकार की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्या होती है-समाज के प्रति ,संस्थान के प्रति?


पंचदेव जी-

एक पत्रकार का प्रथम दायित्व समाज को सही, निष्पक्ष और संतुलित जानकारी देना है, ताकि लोग जागरूक और सशक्त बन सकें। पर मेरे लिए पत्रकारिता एक सेवा है — समाज के सच को सामने लाना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही, संस्थान के प्रति मेरी हमेशा से ये निष्ठा है कि मैं उसके मूल्यों, उसकी पत्रकारिता की गरिमा और विश्वास को कभी आंच न आने दूं। पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं है एक जिम्मेदारी है — सच के प्रति, समाज के प्रति और संस्थान के प्रति भी।"


रजनीश रंजन - 

क्या कभी आपको किसी स्टोरी ने व्यक्तिगत रूप से गहरे प्रभावित किया या बदल दिया? कुछ वैसा हो तो सांझा कीजिये।


पंचदेव जी-

हां, एक स्टोरी आज भी मेरी रूह को झकझोर देती है। एक गांव में रिपोर्टिंग के दौरान मेरी मुलाकात एक बूढ़े बाबा से हुई जो किसान थे।, जिनकी पूरी फसल बर्बाद हो चुकी थी। जानते ही हैं अपने बिहार में बाढ़ और बारिश की हालत !

बारिश ने उनके सपने, उनकी मेहनत — सब कुछ बहा दिया था। वो टूटी हुई झोपड़ी के सामने बैठे थे ,आंखों में थकी हुई सूनी नजरें... लेकिन जब मैंने पूछा — 'अब क्या करेंगे?' — तो वो बस मुस्कुरायें और बोलें, 'मिट्टी से हार मान लेंगे तो जीना छोड़ देंगे बेटा। फिर से बीज डालेंगे... शायद इस बार भगवान सुन ले।'

वो छुपा संघर्ष, खेत में बसी उम्मीद — आज भी जब याद करता हूं तो दिल भीग जाता है। रजनीश जी ,उस दिन लगा कि इनकी कहानी और इनकी बात को सबके सामने लाने ही असली पत्रकारिता है।



रजनीश रंजन- आज की युवा पीढ़ी के पत्रकारों को आप क्या सबसे ज़रूरी सलाह देना चाहेंगे?


पंचदेव जी-

रजनीश जी ,देखिए आज का युवा खुद ही बहुत टैलेंटेड है बस मुझे उनसे इतना कहना है कि तेज़ी से खबर पहुंचाने की होड़ में सच्चाई से समझौता न करें। पत्रकारिता का असली आधार है — गहन शोध, निष्पक्षता और ईमानदारी। जितना जरूरी है तेजी से रिपोर्ट करना, उससे भी ज्यादा जरूरी है सही और संतुलित खबर देना। क्यूंकि एक झूठी खबर से आप हजारों ज़िंदगियों को गुमराह कर सकते हैं, लेकिन एक सच्ची खबर से समाज की दिशा बदल सकते हैं।


रजनीश रंजन- 

आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर। आप हमेशा स्वस्थ रहें ,दीर्घायु हों और समय समय पर अपनी बातें और अपने ज्ञान से हम सबका मार्गदर्शन करते रहें।

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