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जय आदित्य की दोनों आंखें अब किसी औरों का जीवन करेंगी रोशन

  • बेतिया में सड़क हादसे में घायल जय आदित्य 31 दिन बाद आइजीआइएमएस में तोड़ा दम
  • जीवन और मौत के बीच जूझ रहे आदित्य ने मरने से पहले नेत्रदान करने की कही थी बात

पंचदेव कुमार, पटना 

‘मरने के बाद भी आऊं दुनिया को काम मैं’ इस पंक्ति को सिवान जिले के जय आदित्य ने मरने के बाद अपनी दोनों आंखें दान कर चरितार्थ किया है. अब ये आंखें किसी औरों के जीवन को रोशन करेंगी. 24 वर्षीय जय आदित्य बेतिया जिले में डेढ़ साल से खाद्यान विभाग में गुणवत्ता नियंत्रक के रूप में कार्यरत थे. 28 मार्च को वह बेतिया ऑफिस से गुणवत्ता जांच के लिए चनपटिया जा रहे थे. इस दौरान ट्रक ने उनकी बाइक में ठोकर मार दी. इससे घायल जय आदित्य पटना के मेदांता अस्पताल में 29 मार्च से 18 अप्रैल तक वेंटिलेटर पर जीवन मौत से जूझते रहे. 19 अप्रैल को उन्हें आइजीआइएमएस में भर्ती कराया गया. इस बीच स्थिति में सुधार हुई. वेंटिलेटर हट गया और खुद से सांस लेने लगे. परिजनों की उम्मीद जगी थी को जय आदित्य अब जिंदगी का जंग जीत जायेंगे। लेकिन, जय आदित्य तबीयत अचानक फिर बिगड़ने लगी. डॉक्टर ने गहन चिकित्सा शुरू की। लेकिन, सांसे अटक रही थी। परिजन विलाप कर रहे थे। तब जय आदित्य ने पास बैठे परिजन का हाथ आपने हाथों में थाम लड़खड़ाती आवाज में कही यदि मैं न बच पाऊं तो मेरी दोनों आखें दान कर दीजियेगा। मेरे मरने के बाद भी वह आँखें किसी औरों के जीवन को रोशन करेगी। ऐसा होने के बाद मैं समझूंगा की मैं किसी औरों के शरीर में जीवित हूं। आखिर मेरे मरने के बाद ये दोनों नेत्र आग में जल ही तो जायेंगे, तो क्यों न नेत्रदान कर दिया जय। यह कहते ही बहस जय आदित्य बेहोश हो गए। परिजन फफक-फफक कर रो पड़े. इलाज के लिए लोग आर्थिक सहयोग भी कर रहे थे. इस बीच 28 अप्रैल की शाम जय आदित्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. परिजनों में कोहराम मच गया. फिर जय की इच्छा को पूरा करने के लिए परिजनों ने आपसी सहमति से उनकी दोनों आंखें आइजीआइएमएस में दान किया. इसके लिए डॉक्टर प्रमाणपत्र भी प्रदान किया। 

   मृतक जय आदित्य के पिता वीरेंद्र कुमार सिंह सिवान जिले के गौतम बुद्धनगर तरवारा थाना क्षेत्र के दीनदयालपुर के रहनेवाले हैं. वह सम्राट अशोक क्लब के पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान में जिला संरक्षक है. मृतक का बड़ा भाई कुमार आदित्य ने बताया कि आदित्य की मौत के बाद परिवार बिखर गया है. लेकिन, यदि उसकी आंखों से किसी और के जीवन में खुशियां आयेगी, इस उद्देश्य से आदित्य की दोनों आंखें को दान किया गया है. जय आदित्य तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। अब उसकी बस यादें रह जायेंगी.

लोगों ने जताया शोक 

पटना के सम्राट अशोक क्लब के रजनीश भूषण मौर्य, सत्येंद्र कुमार मौर्य, रणधीर कुमार मौर्य सहित कई लोगों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। इन लोगों ने कहा कि जय आदित्य की मौत से हम सब दुखी है। 

बौद्धिक रीति रिवाज से पंचतत्व में विलीन हुए जय आदित्य 

परिजनों ने बताया कि मंगलवार को बौद्धिक रीति रिवाज के अनुसार जय आदित्य पंचतत्व में विलीन हो गए। इससे पहले उनके पैतृक गांव में शव यात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। 


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